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Sunday, August 28, 2011

सफल हुआ अन्ना का अनशन




















गाँधी
को नहीं देखा हमने किन्तु उनके आदर्शों को आज जाना हैं,
अहिंसा में कितनी ताकत हैं , इस बात को आज सभी ने माना है!

कितनी ही सरकारें आयीं, कितने ही नेता बदले,
सबने अपनी सत्ता देखी, भारत कि तरक्की के बदले!

संसद को बनाया जनता ने, पर आज संसद पर जनता का क्यूँ कोई अधिकार नहीं,
कोई करना चाहे शांति से गर अनशन देश कि भलाई कि खातिर, तो क्यूँ संसद को ये स्वीकार नहीं!

एक अनशन करके अन्ना ने देश के हर आम आदमी कि तरफ से एक बुलंद आवाज़ उठायी हैं,
भ्रस्टाचार को कैसे दूर करना हैं, ये बात इन्होने अपने जन लोकपाल बिल मैं बड़े सरलता से समझाई हैं!

सरकार को मगर ये बातें थोड़ी देर से समझ आयीं हैं,
मगर ख़ुशी इस बात कि हैं कि देर से ही सही,
किन्तु भ्रस्टाचार को दूर करने के लिये सरकार ने अपनी सहमती तो जताई हैं!

आज सदियों बाद ऐसा लगता हैं कि देश में एक नई क्रांति ने ली अंगडाई हैं,
अन्ना ने हर आम आदमी को उसके हक़ ओर अधिकारों कि याद दिलाई हैं!

ओर समझाया हैं यही कि, जब कुछ करने का जज्बा सही हो तो जीत एक एक दिन मिल ही जाती हैं
राह कितनी ही मुश्किल क्यूँ ना हो मगर, अंत में राही को मंजिल मिल ही जाती हैं!