
वतन हमारा ऐसा जिसे छोड़े ना छोड़ पाए कोई ,
रिश्ता हमारा इससे कुछ ऐसा, के तोड़े न तोड़ पाए कोई,
पुरे किये हैं हमने आज़ादी के ६४ साल अभी ,
मगर क्या भारत हुआ है आज़ाद इतना मुझे बतलाये कोई,
आये कई नेता कई सरकारें गयी,
मगर न बदली कोई तस्वीर,कई अफवाहें सुनी,
आज भी रोटी नहीं मिलती है लोगों को कहीं,
किसान आज भी मरता है खेतों में कहीं,
ये है वही देश जिसमे उगती हैं फसलें कई,
मगर कुपोषण से मरने वालों कि दरें हैं सबसे ज्यादा यहीं,
हो रही घायल मर्यादा हर मोड़ पर यहीं ,
भ्रस्टाचार कि लगी है होड़ सी यहीं,
कहतें हैं हम स्वतंत्र हो गए, किन्तु अपने ही विचारों में कहीं परतंत्र हो गए,
बढ़ाएंगे हम शान अपनी भारत माता का , अब तो सुनाये देने ये मंत्र भी बंद हो गए !